पार्वती जी की आरती — संपूर्ण पाठ, महत्व और लाभ
माता पार्वती आदिशक्ति का सौम्य और कल्याणकारी स्वरूप हैं। वे भगवान शिव की अर्धांगिनी और समस्त सृष्टि की माता हैं। पार्वती जी को शक्ति, प्रेम, सौंदर्य और वात्सल्य की देवी माना जाता है। गणेश जी और कार्तिकेय जी की माता के रूप में वे समस्त भक्तों पर अपनी ममता लुटाती हैं। माता पार्वती की नित्य आरती करने से सौभाग्य, सुख और मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
पार्वती जी की आरती
जय पार्वती माता, जय पार्वती माता।
ब्रह्म सनातन देवी, शुभ फल की दाता॥
जय पार्वती माता॥
अरिकुल पद्मा विनाशिनि, जय सेवक त्राता।
जग जीवन जगदंबा, हरि हर गुण गाता॥
जय पार्वती माता॥
सिंह का वाहन साजे, कुंडल है साजे।
बाजूबंद नौलखा हार, विराजत माजे॥
जय पार्वती माता॥
देव वधू जग सुंदरी, गिरिराज कुमारी।
शिव शंकर की प्रिय संगिनी, त्रिभुवन सुखकारी॥
जय पार्वती माता॥
श्वेत वर्ण शुभ साड़ी, मस्तक पर मुकुट विराजे।
गले में रुद्राक्ष माला, कर में त्रिशूल साजे॥
जय पार्वती माता॥
गणेश कार्तिक माता, जग में यश पाया।
भक्तों के दुख हरती, सबको अपनाया॥
जय पार्वती माता॥
सोमवार व्रत जो करे, तुमको जो ध्याता।
पति सुख संतान सुख, सब मिल जाता॥
जय पार्वती माता॥
कंचन महल विराजे, शिव संग सोहे।
जो ध्यान तेरा लगाए, मन में वो खोए॥
जय पार्वती माता॥
नित्य आरती जो गाए, भक्ति में रमाए।
माता पार्वती कृपा से, जीवन सफल हो जाए॥
जय पार्वती माता॥
जय पार्वती माता, जय पार्वती माता।
ब्रह्म सनातन देवी, शुभ फल की दाता॥
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माता पार्वती का परिचय और पौराणिक कथा
माता पार्वती हिमालय राज और मैनावती की पुत्री हैं इसलिए उन्हें हिमालय पुत्री और गिरिराज कुमारी भी कहा जाता है। पिछले जन्म में वे सती थीं जिन्होंने अपने पिता दक्ष द्वारा शिव जी का अपमान होने पर यज्ञ कुंड में प्रवेश कर अपने प्राण त्याग दिए थे। अगले जन्म में उन्होंने पार्वती के रूप में जन्म लिया और भगवान शिव को पति रूप में पाने के लिए घोर तपस्या की। उनकी अटल भक्ति और तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें अपनी अर्धांगिनी के रूप में स्वीकार किया।
माता पार्वती के विभिन्न स्वरूप
🌸 दुर्गा — राक्षसों का नाश करने वाला शक्ति स्वरूप।
🌸 काली — तामसिक शक्तियों का विनाश करने वाला भयंकर स्वरूप।
🌸 गौरी — सौम्य और कल्याणकारी श्वेत वर्ण का स्वरूप।
🌸 अंबे — सम्पूर्ण सृष्टि की माता का स्वरूप।
🌸 ललिता — सौंदर्य और प्रेम का स्वरूप।
🌸 अन्नपूर्णा — भोजन और पोषण देने वाला स्वरूप।
🌸 सरस्वती — ज्ञान और विद्या देने वाला स्वरूप।
🌸 लक्ष्मी — धन और वैभव देने वाला स्वरूप।
पार्वती जी की आरती के लाभ
नित्य माता पार्वती की आरती करने से अनेक लाभ प्राप्त होते हैं। सुहागिन स्त्रियों को अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। विवाह में आ रही बाधाएं दूर होती हैं और योग्य जीवनसाथी मिलता है। संतान सुख की प्राप्ति होती है और संतान का जीवन सुखमय रहता है। पति-पत्नी के बीच प्रेम और विश्वास बढ़ता है। घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है। मन की चंचलता दूर होती है और एकाग्रता बढ़ती है।
पार्वती जी की पूजा विधि
माता पार्वती की पूजा करने के लिए सोमवार और शुक्रवार सबसे उत्तम दिन हैं। पूजा में लाल और पीले फूल अर्पित करें। माता को सिंदूर, कुमकुम और हल्दी चढ़ाएं। श्रृंगार की सामग्री जैसे चूड़ी, बिंदी और काजल माता को अर्पित करें। खीर और मिठाई का भोग लगाएं। दीपक जलाकर आरती गाएं और परिक्रमा करें।
माता पार्वती को प्रसन्न करने के उपाय
सोमवार का व्रत रखें और शिव-पार्वती की एक साथ पूजा करें। माता पार्वती को कमल का फूल अत्यंत प्रिय है — पूजा में जरूर चढ़ाएं। गौरी व्रत करने से कुंवारी कन्याओं को मनचाहा वर मिलता है। नवरात्रि में माता के नौ स्वरूपों की पूजा करें। पार्वती जी का बीज मंत्र “ॐ ह्रीं क्लीं पार्वत्यै नमः” का 108 बार जाप करें।
माता पार्वती के प्रमुख मंत्र
ॐ पार्वत्यै नमः — यह सरल मंत्र नित्य जपें।
ॐ ह्रीं क्लीं पार्वत्यै नमः — यह बीज मंत्र अत्यंत शक्तिशाली है।
सर्वमंगल मांगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके। शरण्ये त्र्यंबके गौरी नारायणि नमोस्तुते॥
किन राशियों के लिए विशेष लाभकारी है पार्वती पूजा?
वृषभ, कर्क, कन्या और मीन राशि के जातकों के लिए माता पार्वती की पूजा विशेष फलदायी है। इन राशियों के लोग यदि नित्य पार्वती जी की आरती करें तो उन्हें वैवाहिक जीवन, संतान और स्वास्थ्य के क्षेत्र में शीघ्र लाभ होता है।
माता पार्वती के प्रसिद्ध मंदिर
कामाख्या मंदिर असम — यह माता का सबसे शक्तिशाली शक्तिपीठ माना जाता है। मीनाक्षी मंदिर मदुरै — दक्षिण भारत का सबसे प्रसिद्ध पार्वती मंदिर। ज्वाला देवी मंदिर हिमाचल — यहां माता की ज्योति अनवरत जलती रहती है। त्रिपुर सुंदरी मंदिर राजस्थान — यह 51 शक्तिपीठों में से एक है। गौरी शंकर मंदिर दिल्ली — यहां शिव-पार्वती की एक साथ पूजा होती है।
कब करें पार्वती जी की आरती?
नवरात्रि — चैत्र और शारदीय नवरात्रि में माता की आरती विशेष फलदायी होती है। हरतालिका तीज — इस दिन माता पार्वती की विशेष पूजा की जाती है और व्रत रखा जाता है। गणेश चतुर्थी — गणेश जी की माता के रूप में पार्वती जी की पूजा होती है। महाशिवरात्रि — शिव-पार्वती के विवाह उत्सव के रूप में इस दिन विशेष आरती की जाती है। सोमवार और शुक्रवार — ये दोनों दिन नित्य पूजा के लिए सर्वश्रेष्ठ हैं।
अंतिम बात
माता पार्वती की भक्ति केवल पूजा-पाठ तक सीमित नहीं है। उनका जीवन हम सबके लिए एक आदर्श है। उन्होंने जो लक्ष्य निश्चित किया उसके लिए घोर तपस्या की और अंततः सफलता पाई। जीवन में कठिनाइयां आएं तो माता पार्वती का स्मरण करें और उनसे शक्ति मांगें। माता की कृपा से हर मुश्किल आसान हो जाती है और जीवन में नई रोशनी आती है।
जय माता पार्वती! 🙏 हर हर महादेव!
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