आरती बाबा बालक नाथ

आरती बाबा बालक नाथ जी की — संपूर्ण पाठ, महत्व और लाभ

हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले में स्थित दियोटसिद्ध धाम में बाबा बालक नाथ जी का पवित्र मंदिर है जो लाखों भक्तों की आस्था का केंद्र है। बाबा बालक नाथ जी को भगवान शिव का अवतार माना जाता है। वे बाल ब्रह्मचारी और सिद्ध संत हैं जो अपने भक्तों की हर मनोकामना पूर्ण करते हैं। उत्तर भारत में बाबा बालक नाथ जी की अपार श्रद्धा है और उनकी आरती करने से जीवन के समस्त कष्ट दूर होते हैं।

आरती बाबा बालक नाथ जी की

जय बाबा बालक नाथ, जय बाबा बालक नाथ।
दियोटसिद्ध विराजे, भक्तों के साथ॥

जय बाबा बालक नाथ॥

शिव के अवतारा हो, बाल रूप प्यारा हो।
ब्रह्मचारी न्यारा हो, जग से निराला हो॥
जय बाबा बालक नाथ॥

गेरुआ वस्त्र धारण, हाथ में चिमटा साजे।
हिमाचल की पहाड़ी पर, बाबा का डेरा राजे॥
जय बाबा बालक नाथ॥

रत्ते की पहाड़ी पर, गुफा में ध्यान लगाए।
भक्त जो शरण में आए, मुराद उनकी पाए॥
जय बाबा बालक नाथ॥

दूध और रोटी का भोग, बाबा को अति प्यारा।
माखन मिश्री अर्पण से, होता दुख निवारा॥
जय बाबा बालक नाथ॥

मंगलवार के दिन जो, बाबा का ध्यान धरे।
सच्चे मन से आरती, गाए और करे॥
जय बाबा बालक नाथ॥

संतान सुख जो मांगे, द्वार तेरे आए।
बाबा की कृपा से वो, खाली न जाए॥
जय बाबा बालक नाथ॥

नौकरी व्यापार में जो, बाधा हो भारी।
बाबा के चरणों में जो, करे अरज हमारी॥
जय बाबा बालक नाथ॥

सात समंदर पार से, भक्त चले आते।
दियोटसिद्ध के दर पर, माथा वो नवाते॥
जय बाबा बालक नाथ॥

नित्य आरती जो गाए, बाबा को मनाए।
बालक नाथ की कृपा से, जीवन सफल हो जाए॥
जय बाबा बालक नाथ॥

जय बाबा बालक नाथ, जय बाबा बालक नाथ।
दियोटसिद्ध विराजे, भक्तों के साथ॥

बाबा बालक नाथ जी का परिचय और इतिहास

बाबा बालक नाथ जी को शिव के अवतार के रूप में पूजा जाता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार बाबा जी ने कई जन्मों में अवतार लिया। एक जन्म में वे स्कंद यानी कार्तिकेय के रूप में प्रकट हुए। एक अन्य जन्म में वे नलवाहन के रूप में जन्मे जो कुबेर के पुत्र थे। अंत में उन्होंने हिमाचल प्रदेश में बालक नाथ के रूप में अवतार लिया और दियोटसिद्ध की पावन भूमि पर तपस्या की। बाबा जी ने सदैव बाल रूप में रहने का वरदान प्राप्त किया और अपने भक्तों के कल्याण के लिए यहां निवास किया।

दियोटसिद्ध धाम का महत्व

दियोटसिद्ध हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले में स्थित है और इसे उत्तर भारत के सबसे प्रसिद्ध सिद्ध पीठों में से एक माना जाता है। यहां बाबा जी की पवित्र गुफा है जिसमें भक्त दर्शन करते हैं। गुफा के अंदर बाबा जी की मूर्ति स्थापित है और यहां एक अखंड ज्योति जलती रहती है। हर साल लाखों श्रद्धालु यहां दर्शन करने आते हैं।

बाबा बालक नाथ जी की पूजा विधि

🔱 मंगलवार और शनिवार के दिन बाबा जी की पूजा विशेष फलदायी होती है।

🔱 सुबह स्नान करके लाल या केसरिया वस्त्र पहनें।

🔱 बाबा जी की तस्वीर या मूर्ति के सामने घी का दीपक जलाएं।

🔱 धूप और अगरबत्ती लगाएं।

🔱 बाबा जी को रोटी और दूध का भोग लगाएं।

🔱 माखन और मिश्री भी अर्पित करें।

🔱 लाल फूल और लाल चुनरी चढ़ाएं।

🔱 बाबा जी की आरती गाएं और मनोकामना मांगें।

🔱 प्रसाद सभी में वितरित करें।

बाबा जी का प्रिय भोग

बाबा बालक नाथ जी को रोटी और दूध का भोग सबसे प्रिय है। मान्यता है कि जब बाबा जी गुर्जरी माई के घर रहते थे तब वे रोज उन्हें भोग में रोटी और दूध देती थीं। तभी से यह परंपरा चली आ रही है। इसके अलावा माखन मिश्री और फल भी बाबा जी को अर्पित किए जाते हैं।

गुर्जरी माई और बाबा जी की कथा

पौराणिक कथा के अनुसार बाबा बालक नाथ जी एक गुर्जरी माई के घर बालक रूप में रहते थे। गुर्जरी माई उन्हें अपना पुत्र मानकर उनकी सेवा करती थीं। एक दिन गुर्जरी के पति ने बाबा जी को जंगल में लकड़ी काटने भेजा। बाबा जी ने अपने चिमटे से ही पूरा जंगल साफ कर दिया और लकड़ियां घर ले आए। यह देखकर गुर्जरी का पति चकित रह गया और उसे बाबा जी की दिव्य शक्ति का आभास हुआ। तभी से बाबा जी का चिमटा उनका प्रमुख प्रतीक बन गया।

बाबा बालक नाथ जी की आरती के लाभ

नित्य बाबा बालक नाथ जी की आरती करने से जीवन में अनेक लाभ होते हैं। संतान सुख की प्राप्ति होती है और संतान को कष्ट नहीं होता। नौकरी और व्यापार में आ रही बाधाएं दूर होती हैं। घर में सुख-शांति और समृद्धि आती है। बुरी नजर और नकारात्मक शक्तियों से रक्षा होती है। रोग और कष्टों से मुक्ति मिलती है। मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।

बाबा जी के चमत्कार

बाबा बालक नाथ जी के अनगिनत चमत्कारों की कथाएं प्रसिद्ध हैं। जो भक्त सच्चे मन से बाबा जी की शरण में आता है उसकी हर मुराद पूरी होती है। निःसंतान दंपती को संतान की प्राप्ति हुई है। असाध्य रोगों से पीड़ित भक्त ठीक हुए हैं। बेरोजगार युवाओं को नौकरी मिली है। बाबा जी की महिमा अपार है और उनके भक्त देश-विदेश में फैले हैं।

बाबा जी के प्रमुख मंदिर

🚩 दियोटसिद्ध धाम हमीरपुर हिमाचल प्रदेश — यह बाबा जी का मुख्य और सबसे प्रसिद्ध मंदिर है।

🚩 शाहतलाई मंदिर हिमाचल प्रदेश — यह भी बाबा जी का प्रसिद्ध मंदिर है।

🚩 बाबा बालक नाथ मंदिर दिल्ली — राजधानी में भी बाबा जी के कई मंदिर हैं।

🚩 बाबा बालक नाथ मंदिर पंजाब — पंजाब में भी बाबा जी के अनेक मंदिर स्थापित हैं।

🚩 बाबा बालक नाथ मंदिर हरियाणा — हरियाणा के हर जिले में बाबा जी के मंदिर हैं।

कब जाएं दियोटसिद्ध धाम?

नवरात्रि — चैत्र और शारदीय नवरात्रि में बाबा जी के दर्शन का विशेष महत्व है और इस समय भारी भीड़ होती है। मंगलवार — सप्ताह में मंगलवार को दर्शन करना सबसे शुभ माना जाता है। मार्च से जून — इस समय मौसम सुहावना रहता है और यात्रा आसान होती है। बाबा जी का जन्मोत्सव — इस दिन धाम में विशेष उत्सव और भंडारा होता है।

बाबा जी को प्रसन्न करने के घरेलू उपाय

हर मंगलवार को घर में बाबा जी की आरती करें और रोटी-दूध का भोग लगाएं। लाल रंग का ध्वज या चुनरी बाबा जी को अर्पित करें। बाबा जी के नाम से गरीबों को रोटी और दूध बांटें। बाबा जी का बीज मंत्र “ॐ बाबा बालक नाथाय नमः” का 108 बार जाप करें। घर में बाबा जी की तस्वीर पूर्व या उत्तर दिशा में लगाएं।

किन राशियों के लिए विशेष लाभकारी है बाबा जी की पूजा?

मेष, सिंह, वृश्चिक और धनु राशि के जातकों के लिए बाबा बालक नाथ जी की पूजा विशेष फलदायी है। इन राशियों के लोग यदि नित्य मंगलवार को बाबा जी की आरती करें तो उन्हें संतान, नौकरी और स्वास्थ्य के क्षेत्र में शीघ्र लाभ होता है।

अंतिम बात

बाबा बालक नाथ जी की महिमा अपरंपार है। वे अपने भक्तों को कभी निराश नहीं करते। चाहे आप दियोटसिद्ध धाम जा सकें या नहीं — घर बैठे भी सच्चे मन से बाबा जी की आरती करें और उनकी कृपा प्राप्त करें। बाबा जी का आशीर्वाद लेने के लिए किसी विशेष अनुष्ठान की जरूरत नहीं — बस सच्चा मन और पक्की श्रद्धा काफी है।

जय बाबा बालक नाथ! 🙏 बोलो बाबा की जय!

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