दत्त आरती — संपूर्ण पाठ, महत्व और लाभ
भगवान दत्तात्रेय हिंदू धर्म के सबसे अद्भुत और रहस्यमय देवता हैं। वे त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु और महेश के संयुक्त अवतार हैं। भगवान दत्तात्रेय को गुरु परंपरा का आदि गुरु माना जाता है। महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश और गोवा में दत्त भक्तों की संख्या करोड़ों में है। दत्त आरती करने से जीवन के समस्त कष्ट दूर होते हैं, गुरु कृपा प्राप्त होती है और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है।
दत्त आरती — त्रिगुणात्मक त्रयी
त्रिगुणात्मक त्रयी दत्त हा जाणा।
त्रिभुवनी भरला म्हणूनी त्रिभुवन राणा॥
जय देव जय देव जय श्री गुरुदत्ता।
आरती ओवाळिता हरली भवचिंता॥
सकल मतांचा हा स्वामी।
गुरु ब्रह्मानंद नामी॥
नाद बिंदु कलादी तुज।
नमो नमो स्वामी॥
जय देव जय देव॥
दत्त दत्त म्हणता होती।
पापांची राखरांगोळी॥
भक्त जन पावन होती।
दत्त नामाच्या बळी॥
जय देव जय देव॥
दत्त आरती — हिंदी में
जय दत्त दिगंबर, जय दत्त दिगंबर।
त्रिदेव स्वरूपी, जगत के ईश्वर॥
जय दत्त दिगंबर॥
ब्रह्मा विष्णु महेश, तीनों का है रूप।
एक ही देह में, तीनों की आनूप॥
जय दत्त दिगंबर॥
चार कुत्ते संग हैं, गाय पीछे आती।
छह शिर दो हाथ में, त्रिशूल शोभाती॥
जय दत्त दिगंबर॥
अनसूया माता के, पुत्र रूप आए।
अत्रि ऋषि के घर में, दत्त जन्म पाए॥
जय दत्त दिगंबर॥
चौबीस गुरुओं से, ज्ञान लिया जिसने।
जग को ज्ञान का मार्ग, दिखाया जिसने॥
जय दत्त दिगंबर॥
औदुंबर वृक्ष के नीचे, ध्यान में बैठे।
गंगा के तट पर, भक्तों से मिलते॥
जय दत्त दिगंबर॥
नृसिंह सरस्वती का, अवतार जो लिया।
स्वामी समर्थ बनकर, भक्तों को तारा किया॥
जय दत्त दिगंबर॥
गुरुवार के दिन जो, दत्त ध्यान लगाए।
दत्त कृपा से उसकी, हर मुराद पाए॥
जय दत्त दिगंबर॥
नित्य आरती जो गाए, दत्त को मनाए।
जन्म जन्म के पाप कट, मोक्ष को जाए॥
जय दत्त दिगंबर॥
जय दत्त दिगंबर, जय दत्त दिगंबर।
त्रिदेव स्वरूपी, जगत के ईश्वर॥
भगवान दत्तात्रेय कौन हैं?
भगवान दत्तात्रेय महर्षि अत्रि और माता अनसूया के पुत्र हैं। माता अनसूया की पतिव्रता शक्ति की परीक्षा लेने के लिए ब्रह्मा, विष्णु और महेश साधु के रूप में उनके द्वार पर आए। उन्होंने भोजन के लिए एक अजीब शर्त रखी। माता अनसूया ने अपने पातिव्रत्य के बल से तीनों देवताओं को शिशु रूप में बदल दिया। प्रसन्न होकर तीनों देवताओं ने एक साथ माता के गर्भ से जन्म लिया और दत्तात्रेय के रूप में प्रकट हुए। इसीलिए भगवान दत्तात्रेय में तीनों देवों की शक्ति समाहित है।
दत्तात्रेय के 24 गुरु
भगवान दत्तात्रेय ने प्रकृति और जीव जगत से 24 गुरु बनाए और उनसे ज्ञान प्राप्त किया। यह उनकी सबसे बड़ी विशेषता है।
🌿 पृथ्वी — धैर्य और सहनशीलता का पाठ।
🌊 जल — पवित्रता और शीतलता का गुण।
🔥 अग्नि — तेज और पवित्रता का संदेश।
🌬️ वायु — निर्लिप्तता और स्वतंत्रता का भाव।
🌌 आकाश — असीमितता और विस्तार का ज्ञान।
🌙 चंद्रमा — मन की शांति और स्थिरता।
☀️ सूर्य — ऊर्जा और निःस्वार्थ सेवा।
🕊️ कबूतर — अत्यधिक मोह से मुक्ति।
🐍 अजगर — संतोष और स्वीकृति का भाव।
🐝 मधुमक्खी — संग्रह न करने और वर्तमान में जीने की कला।
🦅 बाज — एकाग्रता और लक्ष्य पर ध्यान।
🐟 मछली — लालच में फंसने से बचना।
🌊 समुद्र — गहराई और स्थिरता।
🦋 पतंगा — आसक्ति से दूर रहना।
🐘 हाथी — कामवासना में न फंसना।
🦌 हिरण — संगीत के मोह से बचना।
🐟 मछुआरे की लड़की — वासना से दूर रहना।
👶 बालक — निर्दोषिता और निर्भयता।
🏹 तीर बनाने वाला — एकाग्रता का महत्व।
🐛 भ्रमर कीड़ा — संगति का प्रभाव।
🕷️ मकड़ी — सृजन और विनाश का ज्ञान।
🐛 इल्ली — चिंतन की शक्ति।
👩 वेश्या पिंगला — वैराग्य का पाठ।
🌿 औदुंबर वृक्ष — दृढ़ता और सेवा।
दत्त आरती का महत्व
दत्त आरती महाराष्ट्र में विशेष रूप से प्रतिदिन शाम को गाई जाती है। दत्त मंदिरों में सुबह और शाम की आरती का विशेष महत्व है। गुरुवार को दत्त आरती करना सबसे शुभ माना जाता है। मार्गशीर्ष पूर्णिमा को दत्त जयंती के रूप में मनाया जाता है और इस दिन आरती का विशेष महत्व होता है।
दत्तात्रेय के अवतार
भगवान दत्तात्रेय ने समय-समय पर अनेक अवतार लिए और अपने भक्तों का उद्धार किया।
🔱 श्रीपाद श्रीवल्लभ — यह दत्तात्रेय का पहला अवतार था जो आंध्र प्रदेश में हुआ।
🔱 नृसिंह सरस्वती — यह दूसरा अवतार था जो कर्नाटक और महाराष्ट्र में प्रसिद्ध है।
🔱 स्वामी समर्थ — यह अकलकोट के स्वामी समर्थ के रूप में तीसरा अवतार था।
🔱 माणिकप्रभु — यह कर्नाटक में हुआ दत्तात्रेय का अवतार था।
🔱 साईं बाबा — अनेक भक्त साईं बाबा को भी दत्तात्रेय का अवतार मानते हैं।
दत्त पूजा की विधि
🪔 गुरुवार को सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और पीले वस्त्र पहनें।
🪔 दत्तात्रेय जी की तस्वीर या मूर्ति के सामने घी का दीपक जलाएं।
🪔 धूप और अगरबत्ती लगाएं।
🪔 पीले फूल और तुलसी दल अर्पित करें।
🪔 खिचड़ी या मीठे चावल का भोग लगाएं।
🪔 दत्त आरती गाएं।
🪔 दत्तात्रेय के मंत्र का जाप करें।
🪔 प्रसाद सभी में वितरित करें।
दत्तात्रेय के प्रमुख मंत्र
ॐ द्रां दत्तात्रेयाय नमः — यह दत्तात्रेय का मूल मंत्र है।
ॐ ऐं क्रों क्लीं क्लूं ह्रां ह्रीं ह्रूं सौः दत्तात्रेयाय स्वाहा — यह शक्तिशाली बीज मंत्र है।
दिगंबरा दिगंबरा श्रीपाद वल्लभ दिगंबरा — यह दत्त नामावली मंत्र है जिसे नित्य जपने से तुरंत लाभ होता है।
दत्त आरती के लाभ
नित्य दत्त आरती करने से जीवन में अनेक लाभ प्राप्त होते हैं। सच्चे गुरु की प्राप्ति होती है और ज्ञान का मार्ग खुलता है। पितृ दोष और ग्रह दोष दूर होते हैं। मन में वैराग्य और शांति आती है। जीवन की समस्त बाधाएं और कष्ट दूर होते हैं। आत्मज्ञान और मोक्ष का मार्ग प्रशस्त होता है। परिवार में सुख-शांति और समृद्धि आती है।
दत्तात्रेय के प्रसिद्ध मंदिर
🚩 गाणगापुर महाराष्ट्र — यह दत्तात्रेय का सबसे प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है जहां नृसिंह सरस्वती का निवास था।
🚩 औदुंबर महाराष्ट्र — यहां दत्तात्रेय का पवित्र औदुंबर वृक्ष है।
🚩 नरसोबाची वाडी महाराष्ट्र — यह कृष्णा नदी के तट पर स्थित प्रसिद्ध दत्त तीर्थ है।
🚩 अकलकोट महाराष्ट्र — यहां स्वामी समर्थ का प्रसिद्ध मंदिर है।
🚩 गिरनार गुजरात — यह दत्तात्रेय की तपस्या स्थली मानी जाती है।
🚩 कुरवपुर कर्नाटक — श्रीपाद श्रीवल्लभ की जन्मस्थली।
कब करें दत्त आरती?
गुरुवार — हर गुरुवार को दत्त आरती करना सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।
दत्त जयंती — मार्गशीर्ष पूर्णिमा को दत्त जयंती मनाई जाती है और इस दिन विशेष पूजा का महत्व है।
मार्गशीर्ष मास — पूरे मार्गशीर्ष मास में दत्त आरती और पूजा विशेष फलदायी होती है।
प्रदोष काल — शाम के समय सूर्यास्त के बाद दत्त आरती करना शुभ माना जाता है।
दत्तात्रेय को प्रसन्न करने के उपाय
गुरुवार को उपवास रखें और दत्तात्रेय की पूजा करें। दिगंबरा दिगंबरा मंत्र का नित्य जाप करें। गुरु गीता का पाठ करें। दत्त भक्तों की सेवा करें। गाय की सेवा करें क्योंकि गाय दत्तात्रेय को अत्यंत प्रिय है। औदुंबर यानी गूलर के पेड़ की पूजा करें।
किन राशियों के लिए विशेष लाभकारी है दत्त पूजा?
मिथुन, कन्या, धनु और मीन राशि के जातकों के लिए दत्तात्रेय की पूजा विशेष फलदायी है। इन राशियों के लोग यदि नित्य गुरुवार को दत्त आरती करें तो उन्हें ज्ञान, करियर और आध्यात्मिक उन्नति में शीघ्र लाभ होता है।
अंतिम बात
भगवान दत्तात्रेय केवल देवता नहीं बल्कि परम गुरु हैं। उन्होंने 24 गुरुओं से ज्ञान लेकर यह सिखाया कि ज्ञान कहीं से भी लिया जा सकता है — बस सीखने की इच्छा होनी चाहिए। जीवन में जब भी मार्गदर्शन की जरूरत हो तो दत्तात्रेय की शरण लें। उनकी आरती और मंत्र जाप से मन को असीम शांति मिलती है और जीवन का सही मार्ग मिलता है।
जय दत्त दिगंबर! 🙏 दिगंबरा दिगंबरा श्रीपाद वल्लभ दिगंबरा!
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