Hanuman Ji Ki Aarti — आरती कीजै हनुमान लला की | lyrics, महत्व और पाठ विधि

क्या आपने कभी सोचा है कि मंगलवार की सुबह मंदिर में जब घंटियाँ बजती हैं और पूरा माहौल “आरती कीजै हनुमान लला की” की गूंज से भर जाता है — तो मन को इतनी शांति क्यों मिलती है? बस एक आरती, और लगता है जैसे सारी चिंताएं पल भर में गायब हो गईं। यही है Hanuman Ji Ki Aarti की असली ताकत। ये सिर्फ कुछ पंक्तियाँ नहीं हैं — ये एक ऐसी आध्यात्मिक शक्ति है जो सदियों से करोड़ों भक्तों के दिल को छूती आई है। अगर आप हनुमान जी की आरती का सही अर्थ, सही तरीका और पूरी lyrics एक जगह चाहते हैं — तो यह पोस्ट सिर्फ आपके लिए है। पूरा पढ़िए, क्योंकि अंत तक आपको कुछ ऐसा मिलेगा जो शायद आपने पहले कहीं नहीं पढ़ा।

Hanuman Ji Ki Aarti क्यों गाई जाती है?

हनुमान जी की आरती कोई साधारण भजन नहीं है। यह तुलसीदास जी द्वारा रचित एक ऐसी स्तुति है जो हनुमान जी के पूरे जीवन और उनके अद्भुत पराक्रम को बस कुछ पंक्तियों में समेट देती है।

हिंदू धर्म में माना जाता है कि हनुमान जी कलियुग में सबसे जागृत देवता हैं। यानी जो भी सच्चे मन से उन्हें याद करे, वो कभी खाली हाथ नहीं लौटता। Hanuman Ji Ki Aarti गाने से —

  • मन की नकारात्मकता दूर होती है
  • घर में सुख-शांति आती है
  • शनि और मंगल दोष शांत होते हैं
  • बीमारी और बुरी शक्तियों का प्रभाव कम होता है
  • भक्त को बैकुंठ की प्राप्ति का आशीर्वाद मिलता है

यही कारण है कि मंगलवार व्रत, शनिवार पूजा, हनुमान जन्मोत्सव, बूढ़े मंगलवार और अखंड रामायण पाठ — हर अवसर पर यह आरती अनिवार्य मानी जाती है।

॥ श्री हनुमंत स्तुति ॥

आरती शुरू करने से पहले यह स्तुति पढ़ी जाती है —

मनोजवं मारुत तुल्यवेगं,
जितेन्द्रियं, बुद्धिमतां वरिष्ठम् ॥
वातात्मजं वानरयुथ मुख्यं,
श्रीरामदुतं शरणम प्रपद्धे ॥

अर्थ: जो मन की गति से चलते हैं, पवन के समान वेग वाले हैं, इंद्रियों को जीतने वाले हैं, बुद्धिमानों में सर्वश्रेष्ठ हैं, पवनपुत्र हैं, वानर सेना के प्रमुख हैं और श्रीराम के दूत हैं — उन हनुमान जी की मैं शरण लेता हूं।

Hanuman Ji Ki Aarti — पूरी Lyrics हिंदी में

॥ आरती ॥

आरती कीजै हनुमान लला की ।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ॥

जाके बल से गिरवर काँपे ।
रोग-दोष जाके निकट न झाँके ॥
अंजनि पुत्र महा बलदाई ।
संतन के प्रभु सदा सहाई ॥
आरती कीजै हनुमान लला की ॥

दे वीरा रघुनाथ पठाए ।
लंका जारि सिया सुधि लाये ॥
लंका सो कोट समुद्र सी खाई ।
जात पवनसुत बार न लाई ॥
आरती कीजै हनुमान लला की ॥

लंका जारि असुर संहारे ।
सियाराम जी के काज सँवारे ॥
लक्ष्मण मुर्छित पड़े सकारे ।
लाये संजिवन प्राण उबारे ॥
आरती कीजै हनुमान लला की ॥

पैठि पताल तोरि जमकारे ।
अहिरावण की भुजा उखारे ॥
बाईं भुजा असुर दल मारे ।
दाहिने भुजा संतजन तारे ॥
आरती कीजै हनुमान लला की ॥

सुर-नर-मुनि जन आरती उतरें ।
जय जय जय हनुमान उचारें ॥
कंचन थार कपूर लौ छाई ।
आरती करत अंजना माई ॥
आरती कीजै हनुमान लला की ॥

जो हनुमानजी की आरती गावे ।
बसहिं बैकुंठ परम पद पावे ॥
लंक विध्वंस किये रघुराई ।
तुलसीदास स्वामी कीर्ति गाई ॥

आरती कीजै हनुमान लला की ।
दुष्ट दलन रघुनाथ कला की ॥

॥ इति संपूर्णंम् ॥

Hanuman Ji Ki Aarti का अर्थ — हर पंक्ति की सच्ची व्याख्या

“आरती कीजै हनुमान लला की, दुष्ट दलन रघुनाथ कला की”

यह मुख्य टेक है पूरी आरती की। इसमें हनुमान जी को “लला” यानी प्यारे बच्चे की तरह पुकारा गया है। साथ ही उन्हें “रघुनाथ की कला” कहा गया है — यानी वो श्रीराम की ही शक्ति के प्रतीक हैं जो दुष्टों का नाश करती है।

“जाके बल से गिरवर काँपे, रोग-दोष जाके निकट न झाँके”

इस पंक्ति में हनुमान जी की अपार शक्ति का वर्णन है। पहाड़ भी उनके बल से थरथराते हैं। और जहां हनुमान जी का वास होता है — वहां रोग, दोष और बुरी नजर भी पास नहीं फटकती।

“लंका जारि असुर संहारे, लक्ष्मण मुर्छित पड़े — लाये संजिवन प्राण उबारे”

यह पंक्तियाँ उस महान घटना को याद दिलाती हैं जब हनुमान जी ने रात भर में पूरा द्रोणाचल पर्वत उठाकर लक्ष्मण जी की जान बचाई थी। यह भक्ति और सेवा का सर्वोच्च उदाहरण है।

“पैठि पताल तोरि जमकारे, अहिरावण की भुजा उखारे”

यहां अहिरावण वध का प्रसंग है। जब अहिरावण राम-लक्ष्मण को पाताल ले गया, तब हनुमान जी पाताल में घुसे और उसका वध किया। यह उनकी निर्भयता और स्वामिभक्ति का प्रमाण है।

“जो हनुमानजी की आरती गावे, बसहिं बैकुंठ परम पद पावे”

यह आखिरी और सबसे महत्वपूर्ण पंक्ति है। तुलसीदास जी कहते हैं — जो भी सच्चे मन से यह आरती गाता है, उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।

Hanuman Ji Ki Aarti कब और कैसे करें?

सही समय

  • मंगलवार और शनिवार — सबसे उत्तम दिन
  • सुबह सूर्योदय के समय — ब्रह्म मुहूर्त
  • शाम की संध्या आरती — सूर्यास्त के बाद

सही विधि

  1. पहले स्नान करके स्वच्छ वस्त्र पहनें
  2. हनुमान जी की प्रतिमा या तस्वीर के सामने दीपक जलाएं
  3. लाल फूल, सिंदूर और चमेली का तेल अर्पित करें
  4. श्री हनुमंत स्तुति से शुरुआत करें
  5. फिर पूरी Hanuman Ji Ki Aarti गाएं
  6. अंत में प्रसाद वितरण करें

क्या अर्पित करें?

  • लाल गुलाब या गेंदे के फूल
  • सिंदूर और चमेली का तेल
  • बूंदी या बेसन के लड्डू
  • पान का बीड़ा

किन अवसरों पर यह आरती विशेष रूप से गाई जाती है?

अवसरमहत्व
हनुमान जन्मोत्सवजन्मदिन की आरती — सबसे पवित्र
मंगलवार व्रतसाप्ताहिक पूजा का अनिवार्य हिस्सा
शनिवार पूजाशनि दोष निवारण के लिए
बूढ़े मंगलवारविशेष मनोकामना पूर्ति के लिए
अखंड रामायण पाठसमापन आरती के रूप में

Hanuman Ji Ki Aarti — आध्यात्मिक महत्व

हनुमान जी को कलियुग का सबसे जाग्रत देवता माना गया है। शास्त्रों में लिखा है कि जहां राम नाम का गुणगान होता है — वहां हनुमान जी अवश्य विराजते हैं। Hanuman Ji Ki Aarti गाना असल में उन्हें आमंत्रण देना है — अपने घर में, अपने मन में।

जब आप यह आरती गाते हैं तो सिर्फ शब्द नहीं बोलते — आप उस ऊर्जा को जगाते हैं जो लंका जला सकती है, पहाड़ उठा सकती है और मृत्यु को भी जीवन दे सकती है।

निष्कर्ष

Hanuman Ji Ki Aarti सिर्फ एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं — यह जीवन जीने का एक तरीका है। जब भी मन घबराए, जब भी रास्ता न सूझे — बस एक बार सच्चे मन से “आरती कीजै हनुमान लला की” गाइए। हनुमान जी खुद आपकी रक्षा करेंगे।

जय श्री राम 🙏 जय हनुमान

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