भागवत भगवान की आरती

भागवत भगवान की आरती — संपूर्ण पाठ, महत्व और लाभ

श्रीमद्भागवत महापुराण हिंदू धर्म के 18 पुराणों में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है। यह केवल एक धार्मिक ग्रंथ नहीं बल्कि जीवन का सार है। भागवत कथा सुनने और भागवत जी की आरती करने से मन को अपार शांति मिलती है, पापों का नाश होता है और भगवान विष्णु की कृपा सदैव बनी रहती है।

भागवत भगवान की आरती

आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥

गले में बैजंती माला, बजावत मुरली मधुर बाला।
श्रवण में कुंडल झलकाला, नंद के आनंद नंदलाला।
गगन सम अंग कांति काली, राधिका चमक रही आली।
लतन में ठाढ़े बनमाली, भ्रमर सी अलक, कस्तूरी तिलक,
चंद्र सी झलक — आरती कुंजबिहारी की॥

कनकमय मोर मुकुट बिलसै, देवता दरसन को तरसैं।
गगन सों सुमन रासि बरसैं, बजे मुरचंग, मधुर मिरदंग,
ग्वालिन संग — आरती कुंजबिहारी की॥

जहां ते प्रकट भई गंगा, सकल मन हारिणि श्री गंगा।
स्मरन ते होत मोह भंगा, बसी शिव सीस, जटा के बीच,
हरै अघ कीच — आरती कुंजबिहारी की॥

चमकती उज्ज्वल तट रेनू, बज रही वृंदावन बेनू।
चहुं दिसि गोपि ग्वाल धेनू, हंसत मृदु मंद, चांदनी चंद,
युत ब्रज इंद — आरती कुंजबिहारी की॥

कहत नारायण आनंद माना, निज के दास भगत सुखदाना।
सदा राखो भक्तन की आना, रसिक शिरोमणि, नित प्रति सुनि,
भव भय हरणी — आरती कुंजबिहारी की॥

आरती कुंजबिहारी की, श्री गिरिधर कृष्ण मुरारी की॥

भागवत जी की आरती

आरती भागवत जी की कीजै।
हरि के भक्तों मिलकर गाओ, पुण्य फलों को लीजै॥

सुखदेव जी ने राजा को सुनाई।
परीक्षित को मोक्ष गति पाई॥
सात दिवस में कथा सुनाई, भव बाधा सब भागी।
आरती भागवत जी की कीजै॥

द्वादश स्कंधों का है यह सार।
अठारह हजार श्लोकों का भंडार॥
वेद व्यास ने किया उपकार, जग को दिया ज्ञान भारी।
आरती भागवत जी की कीजै

नारद मुनि ने व्यास को समझाया।
भक्ति मार्ग का रहस्य बताया॥
श्री कृष्ण चरित्र का गुण गाया, मन की प्यास बुझाई।
आरती भागवत जी की कीजै॥

जो नर नित्य भागवत पढ़ते।
हरि के चरणों से जुड़ते॥
भव सागर से पार हो जाते, मिले मोक्ष की छाया।
आरती भागवत जी की कीजै॥

आरती भागवत जी की कीजै।
हरि के भक्तों मिलकर गाओ, पुण्य फलों को लीजै॥

श्रीमद्भागवत का महत्व

श्रीमद्भागवत को पुराणों का राजा कहा जाता है। इसमें 12 स्कंध, 335 अध्याय और 18,000 श्लोक हैं। महर्षि वेदव्यास ने इसकी रचना की और महर्षि नारद के आदेश पर इसे पूर्ण किया। इस ग्रंथ में भगवान विष्णु के 24 अवतारों की कथा, भक्ति का सार और मोक्ष का मार्ग बताया गया है।

भागवत के 12 स्कंध और उनका सार

🌸 प्रथम स्कंध — भक्ति का महत्व और परीक्षित की कथा।

🌸 द्वितीय स्कंध — सृष्टि का वर्णन और ईश्वर का स्वरूप।

🌸 तृतीय स्कंध — विदुर और मैत्रेय का संवाद, सृष्टि रचना।

🌸 चतुर्थ स्कंध — ध्रुव और पृथु महाराज की कथा।

🌸 पंचम स्कंध — ऋषभदेव और भरत की कथा।

🌸 षष्ठ स्कंध — अजामिल की कथा और नाम महिमा।

🌸 सप्तम स्कंध — प्रह्लाद चरित्र और नृसिंह अवतार।

🌸 अष्टम स्कंध — गजेंद्र मोक्ष और वामन अवतार।

🌸 नवम स्कंध — राजवंशों का वर्णन और राम कथा।

🌸 दशम स्कंध — श्री कृष्ण की संपूर्ण लीला कथा।

🌸 एकादश स्कंध — उद्धव गीता और कृष्ण की विदाई।

🌸 द्वादश स्कंध — कलियुग का वर्णन और भागवत माहात्म्य।

भागवत कथा सुनने के लाभ

भागवत कथा सुनने से समस्त पापों का नाश होता है। मन में वैराग्य और भक्ति की भावना जागती है। जीवन में आने वाली बाधाएं और कष्ट दूर होते हैं। परिवार में सुख, शांति और समृद्धि बढ़ती है। मृत्यु के बाद मोक्ष की प्राप्ति होती है और पुनर्जन्म के चक्र से मुक्ति मिलती है।

आरती पाठ की विधि

भागवत जी की आरती करते समय इन बातों का ध्यान रखें। सुबह या शाम स्नान करके शुद्ध वस्त्र पहनें। भागवत जी को पीले वस्त्र और पीले फूल अर्पित करें। घी या तेल का दीपक जलाएं। परिवार के सभी सदस्य एकत्र होकर आरती गाएं। आरती के बाद तुलसी दल और मिश्री का प्रसाद बांटें।

कब करें भागवत जी की आरती?

एकादशी, जन्माष्टमी, कार्तिक मास और श्रावण मास में भागवत जी की आरती विशेष फलदायी होती है। घर में भागवत सप्ताह या भागवत पाठ के समापन पर यह आरती अवश्य करें। प्रतिदिन संध्या के समय भागवत जी की आरती करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा बनी रहती है।

अंतिम बात

श्रीमद्भागवत केवल एक ग्रंथ नहीं — यह ईश्वर का साक्षात स्वरूप है। जिस घर में भागवत कथा होती है, भागवत जी की आरती गाई जाती है — उस घर में भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की कृपा सदैव बनी रहती है। आज ही अपने घर में भागवत जी की स्थापना करें और नित्य आरती का संकल्प लें।

जय श्री कृष्ण! 🙏 हरि बोल! हरि बोल

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