आरती रामायण जी की — संपूर्ण पाठ, महत्व और लाभ
रामायण केवल एक ग्रंथ नहीं, यह जीवन जीने की कला है। भगवान श्री राम के जीवन चरित्र पर आधारित यह महाकाव्य सदियों से करोड़ों भक्तों के दिलों में बसा हुआ है। रामायण जी की आरती का पाठ करने से मन को शांति मिलती है, घर में सुख-समृद्धि आती है और भगवान राम की कृपा सदैव बनी रहती है।
रामायण जी की आरती
आरती कीजै रामायण जी की।
निर्मल वाणी तुलसीदास जी की॥
जो नर नित्य रामायण पढ़ते।
राम भक्ति के फल वो ही पाते॥
भव सागर से पार हो जाते।
आरती कीजै रामायण जी की॥
रामचरित मानस के गाते।
मन की मैल सभी दूर हो जाते॥
राम नाम का दीप जलाते।
आरती कीजै रामायण जी की॥
सीता माता जनक दुलारी।
लक्ष्मण भरत सभी हितकारी॥
हनुमत भक्त शिरोमणि भारी।
आरती कीजै रामायण जी की॥
बाल काण्ड से लंका काण्ड तक।
राम कथा है मंगल झांक तक॥
उत्तर काण्ड पहुंचे जो भक्त।
आरती कीजै रामायण जी की॥
जो नर आरती नित्य उचारे।
राम भक्ति के द्वार वो खोले॥
पाप ताप सब दूर हो जाते।
आरती कीजै रामायण जी की॥
आरती कीजै रामायण जी की।
निर्मल वाणी तुलसीदास जी की॥
रामायण जी की आरती का महत्व
रामायण जी की आरती का पाठ करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। जब भी घर में रामायण का पाठ पूर्ण हो, सुंदरकांड का पाठ हो, या कोई धार्मिक अनुष्ठान हो — तब इस आरती का गायन जरूर करना चाहिए। यह आरती भगवान राम, माता सीता, लक्ष्मण जी और हनुमान जी को एक साथ समर्पित है।
रामायण के सात काण्ड और उनका संक्षिप्त परिचय
🌸 बाल काण्ड — भगवान राम के जन्म से लेकर सीता स्वयंवर तक की कथा।
🌸 अयोध्या काण्ड — राम का वनवास और अयोध्या का विरह।
🌸 अरण्य काण्ड — वन में राम का जीवन और सीता हरण की घटना।
🌸 किष्किंधा काण्ड — सुग्रीव से मित्रता और वानर सेना का निर्माण।
🌸 सुंदर काण्ड — हनुमान जी की लंका यात्रा और सीता माता का पता लगाना।
🌸 लंका काण्ड — रावण वध और सीता माता की वापसी।
🌸 उत्तर काण्ड — राम राज्य की स्थापना और आदर्श शासन।
आरती पाठ के नियम और विधि
रामायण की आरती करते समय कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है। पूजा स्थल को साफ करें और दीपक जलाएं। तुलसी के पत्ते और फूल अर्पित करें। शंख और घंटी बजाते हुए आरती गाएं। आरती के बाद प्रसाद वितरण करें। परिवार के सभी सदस्य मिलकर आरती गाएं तो और भी शुभ होता है।
रामायण पाठ के अद्भुत लाभ
नित्य रामायण पाठ करने से मन शांत और एकाग्र होता है। घर में कलह और नकारात्मकता दूर होती है। संतान सुख, धन लाभ और आरोग्य की प्राप्ति होती है। कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी राम कृपा से रास्ता निकलता है। तुलसीदास जी ने कहा है कि रामचरित मानस का पाठ करने वाला भव सागर से पार हो जाता है।
कब करें रामायण जी की आरती?
रामनवमी, हनुमान जयंती, मंगलवार और शनिवार के दिन यह आरती विशेष फलदायी होती है। इसके अलावा घर में सुंदरकांड पाठ, अखंड रामायण या किसी भी धार्मिक अनुष्ठान के समापन पर यह आरती अवश्य गाएं।
अंतिम बात
रामायण जी की आरती केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है — यह आत्मा को परमात्मा से जोड़ने का माध्यम है। जब भी मन उदास हो, जीवन में कठिनाई आए — बस राम नाम जपें और रामायण जी की आरती गाएं। भगवान राम की कृपा से हर मुश्किल आसान हो जाती है।
जय श्री राम!